काल्पनिक ही सही ,
पर कुछ किरदारों को मिलाने से इतिहास बन सकता है ! मिसाल के तौर पर एक चरित्र गढ़ा गया राम जिसका विवाह वशिष्ठ द्वारा संभव हो पाया - विवाह था तो प्रासंगिक तौर पर कुछ शर्ते रही होंगी , बस कहिये शर्तो की शुरुआत - परशुराम का धनुष तोड़ना , फिर मसला आया प्रॉपर्टी का हिस्से बांटे
चुकी वशिष्ठ बरसो से जंगल में खेती करते आये थे उन्हें लगा , मामला हम बन में सुलझा लेंगे !
वशिष्ठ की ये अवधारणा भी काम नहीं आयी वशिष्ठ को रा वन ने दुखी देखा, फिर इस कहानी में एक और किरदार आया रा वण , अब रा वन में रा वण ने राम को दुखी करने का प्रोग्राम स्टार्ट किया , एक हद तक वो सफल भी हुआ , फिर हवाई जहाज से अयोध्या आगमन हुआ .
कुछ समय तक सब ठीक चला , अब तो रावण भी नहीं अब क्या करे !
फिर आया एक धोबी - राम को दुखी करने का प्रोग्राम Re स्टार्ट किया !
कहानी में कई मोड़ आये और अंत तो गत्वा
He GOT TWINS :P
वशिष्ठ ने ये सिखाया की जिस परम्परा का प्रारम्भ उसने किया था वो सही थी - वशिष्ठ भी खुश गांव भी खुश !