Wednesday, January 16, 2019

बहकी है निगाहे और बिखरे है बाल



अर्ध कुम्भ - @ the door off Sir U



अच्छी खासी सामाजिक व्यवस्था के बीच ६ / १२ वर्षो में चंद नहीं असंख्य नवागंतुकों का आगमन न जाने कहाँ कहाँ से होता है कहना / ढूँढना मुश्किल है 

अर्ध कुम्भ और पूर्ण कुम्भ ये होते क्या और क्यों है ये जानने का प्रयास करने का वक़्त भी नहीं है , रहना हमें सामाजिक दायरों में ही है 

फिर इसी सामाजिक व्यवस्था से कुछ लोग कुम्भ से जुड़ जाते है प्रत्यक्ष जो साधुवाद(नीचे तस्वीर) का हिस्सा बनते है कुछ महज व्यावसायिक उद्देश्य क्योकि परिवार चलाना है, परोक्ष भी जो दोनों से अलग है जिज्ञासा वश  इस तरह के मेलों का हिस्सा होते है 




खाइके पान...  की एवज पी के हुक्का  Sir you wala

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